साहित्य

महाराणा प्रताप जयंती – मेवाड़ के महान योद्धा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

भारत में हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को महान वीरयोद्धा महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाती है। इस तिथि के अनुसार आज 25 मई को महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जा रही है। अपने बहादुरी, वीरता और साहस के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 राजस्थान के कुम्भलगढ़ में महाराणा उदयसिंह के घर हुआ था। प्रताप ऐसे योद्धा थे जो कभी मुगलों के आगे नहीं झुके। उनका संघर्ष इतिहास में अमर है। महाराणा प्रताप मेवाड़ के महान हिंदू शासक थे। सोलहवीं शताब्दी के राजपूत शासकों में महाराणा प्रताप ऐसे शासक थे, जो अकबर को लगातार टक्कर देते रहे। भारत का हर बच्चा उनके बारे में पढ़ते हुए बड़ा हुआ है। इसके बावजूद उनके बारे में कुछ बातें ऐसी हैं जो सुनने में तो असंभव लगती हैं, लेकिन हकीकत में सच हैं।

मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और हाईट 7 फीट 5 इंच थी। महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में आज भी सुरक्षित हैं।

महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था।

महाराणा प्रताप का घोड़ा, चेतक हवा से बातें करता था। उसने हाथी के सिर पर पैर रख दिया था और घायल प्रताप को लेकर 26 फीट लंबे नाले के ऊपर से कूद गया था।

 हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था। अकबर और राणा के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था। ऐसा माना जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे। मुगलों के पास सैन्य शक्ति अधिक थी तो राणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति की कोई कमी नहीं थी।

आपको बता दें हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे और अकबर के पास 85000 सैनिक। इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे।

कहते हैं कि अकबर ने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए 6 शान्ति दूतों को भेजा था, जिससे युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जा सके, लेकिन महाराणा प्रताप ने यह कहते हुए हर बार उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया कि राजपूत योद्धा यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता।

हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाले सिर्फ एक मुस्लिम सरदार था – हकीम खां सूरी।

अकबर ने राणा प्रताप को कहा था की अगर तुम हमारे आगे झुकते हो तो आधा भारत आप का रहेगा, लेकिन महाराणा प्रताप ने कहा मर जाऊँगा लेकिन मुगलों के आगे सर नही नीचा करूंगा। प्रताप का सेनापति सिर कटने के बाद भी कुछ देर तक लड़ता रहा था। प्रताप ने मायरा की गुफा में घास की रोटी खाकर दिन गुजारे थे। महाराणा प्रताप हमेशा दो तलवार रखते थे एक अपने लिए और दूसरी निहत्थे दुश्मन के लिए। अकबर ने एक बार कहा था की अगर महाराणा प्रताप और जयमल मेड़तिया मेरे साथ होते तो हम विश्व विजेता बन जाते।

अकबर महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा शत्रु था, पर उनकी मौत का समाचार सुन अकबर रोने लगा था क्योंकि ह्रदय से वो महाराणा प्रताप के गुणों का प्रशंसक था और अकबर जनता था कि महाराणा जैसा वीर इस धरती पर कोई नहीं है।

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