2021-03-04
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सागर

स्कूली बच्चों की ड्रेस बनाकर देवरी ब्लॉक की 200 महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

आशीष दुबे देवरी कला। स्कूली बच्चों की ड्रेस की सिलाई करके देवरी ब्लॉक की 200 से अधिक स्व सहायता समूह की महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
देवरी ब्लॉक के 13  स्व सहायता समूह के माध्यम से सिलाई करके 8 से लेकर 15 हजार तक हर माह कमा रहीं हैं और अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।
पिछले 2 माह से राज्य आजीविका मिशन के माध्यम से शासन द्वारा कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र /छात्राओं के लिए स्कूली ड्रेस बनाने का काम किया जा रहा है।
यह काम ब्लॉक के 13 स्व सहायता समूह कि 200 महिला सदस्यों ने पिछले 2 महीनों में 23500 स्कूली बच्चों की ड्रेस तैयार कर दिए हैं जिनकी पैकिंग का काम भी पूर्ण हो चुका है।
राज्य आजीविका मिशन देवरी ब्लॉक मैनेजर नीरज डहरवाल ने बताया कि देवरी ब्लॉक के शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए दो ड्रेसों का वितरण किया जाना है।
यह वितरण का काम 9 अप्रैल से स्कूलों में प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 23500 ड्रेस तैयार हो गई है और स्कूलों में पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ड्रेस बनाने का काम देवरी ब्लॉक के 13 स्व सहायता समूहों में कार्यरत 200 महिला सदस्यों ने पिछले 2 महीने में पूर्ण कर लिया है और उन्हें अच्छा खासा रोजगार भी उपलब्ध कराया गया है।
जय मां बिजासेन सिलाई सेंटर की संचालिका संध्या लोधी ने बताया कि उनके सेंटर पर 35 महिलाएं सिलाई का काम कर रहीं हैं जिन्हें उनके सेंटर में प्रशिक्षण दिया गया था अब यह महिलाएं आत्मनिर्भर बनती जा रहीं हैं। जो महिलाएं घर में बैठकर चूल्हा चौकी तक सिमट गई थी वह अब सिलाई करके 8000 से लेकर 15000 रूपए महीने का काम कर रहीं हैं।
उन्होंने बताया कि ओम समूह की राधा ठाकुर आर्थिक स्थिति से अत्यधिक कमजोर थी उन्होंने सिलाई करके अपने परिवार का जीवन स्तर सुधार लिया है।
इसी तरह मनीषा लोधी ने सिलाई सीकर अपने परिवार की आर्थिक दशा सुधार लिया और वह मजदूरी करने ना जाकर अब सिलाई में ही पूरा समय लगा रहीं हैं। संतोषी माता स्व सहायता समूह की संचालिका कुसम रानी ने बताया कि उनके यहां 9 महिलाएं सिलाई का काम कर रहीं हैं और वह अच्छा खासा रोजगार पा रहीं हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम- बेलढाना की लीलावती सिलाई करके अपने अपूर्ण पड़े मकान का काम पूर्ण करा लिया है और वह अपने परिवार की आर्थिक दशा सुधारने के लिए लगातार मेहनत कर रहीं हैं।
इनका कहना है :
राज्य आजीविका मिशन के माध्यम से देवरी ब्लॉक के कमजोर परिवार की महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है और 200 महिलाएं लाभान्वित हुई हैं वह अब 8000 से लेकर 15000 रुपए महीने सिलाई के माध्यम से कमा रहीं हैं और आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। इन महिलाओं ने 2 महीने में 23500 स्कूली बच्चों की ड्रेस तैयार कर ली है जबकि लक्ष्य के अनुसार से तीस हजार ड्रेस बनना है शेष ड्रेस बनाने का काम 1 सप्ताह में पूर्ण कर लिया जाएगा ।
नीरज डहरवाल, ब्लॉक मैनेजर आज का मिशन देवरी।
2021-03-04
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