2021-03-04
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नरसिंहपुर

सचिव की कार्यप्रणाली से सरपंच सहित ग्रामीण परेशान

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रोहित रजक करेली। पंचायत के विकास में सरपंच, सचिव, जीआरएस को एकमत होकर आपसी सहभागिता से कार्य करना बेहद महत्वपूर्ण होता है, पर जिस पंचायत में सचिव ही अपने आप को सर्वोपरि मान ले और सरपंच तक की सलाह को दरकिनार कर दे तो उस पंचायत के सचिव से जनता की समस्या सुनकर निराकरण और ग्राम विकास की अपेक्षा करना दिन में तारे देखने के समान है। ऐंसा ही एक मामला जनपद पंचायत चावरपाठा अंतर्गत आने वाली ग्राम- पंचायत अंडिया में देखने मिला जहाँ सचिव मनीष उपाध्याय की कार्यशैली से सरपंच सहित ग्रामीण परेशान हैं। उनका कहना है कि सचिव पंचायत का संचालन अपने मनमाने तरीके से करते हैं, सरपंच को बिना बताए DSC के द्वारा भुगतान कर लेना, ग्राम के विकास कार्य में कोई रुचि ना रखना और हफ्तों-हफ्तों बीत जाने के बाद भी पंचायत न आकर घर से ही पंचायत चला रहे हैं। सचिव साहब का रुतबा यह है कि वह अपने आपको किसी बड़े अधिकारी से कम नहीं समझते। जहाँ एक ओर देश के प्रधानमंत्री जनता को सरल-सहज सुविधा मुहैया कराने के लिए डिजिटल इंडिया को लेकर काम कर रहे हैं तो सचिव महोदय ग्रामीणों का फ़ोन तक उठाना उचित नही समझते। उक्त समस्याओं से तंग आकर ग्रामीणों ने सरपंच के नेतृत्व में विगत 2 माह पूर्व सचिव के स्थानांतरण हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा था, जिससे आज तक कोई भी ठोस कार्यवाही न होने के कारण सचिव के होंसले बुलंद होते जा रहे हैं।
सरपंच का कहना
मैने कई बार सचिव को फोन किया लेकिन सचिव कभी फोन नहीं उठाते, फिर मैने बहुत समय से संपर्क करना ही छोड़ दिया। जहाँ तक कि कब वो पंचायत आते और कब चले जाते हैं इसका भी किसी को पता नहीं। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित व मौखिक रूप से शिकायत की गई परंतु सचिव पर कार्यवाही नहीं हुई।
2021-03-04
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